बोली प्रकिया का परिदृश्य 

 

 भाराराप्रा द्वारा हाथ में ली गई परियोजनाओं के प्रकार    :

 1.निर्माण, प्रचालन और हस्तांतरण  ( बीओटी )

राष्ट्रीय राजमाग के निर्माण और रख-रखाव में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने हेतु बीओटी आधार पर परियोजनाओं का ठेका दिया जाता है । रियायत अवधि, जो 30 वर्ष तक हो सकती है, के बाद रियायतग्राही द्वारा भाराराप्रा को सड़क वापस हस्तांतरित कर दी जाती है । दिल्ली - गुडगाँव खंड  ( 8/6 लेन की पहुँच नियंत्रित ) और नेल्लोर - टाडा आदि परियोजनाएँ बीओटी आधार पर निष्पादित की जा रही हैं । 


2.बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ

भाराराप्रा ऐसी परियोजनाओं के लिए एक कार्यान्वयन एजेंसी के प में कार्य करता है जिनके लिए एडीबी और विश्व बैंक अथवा जेआईबीसी जैसी बहुपक्षीय विकास एजेंसियों से ऋण सहायता प्राप्त होती है । इन परियोजनाओं के लिए अधिकांश धनराशि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बजट के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है और भाराराप्रा को इन परियोजनाओं के निष्पादन के लिए एजेंसी प्रभार प्राप्त होते हैं । 


3.भाराराप्रा द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ

भाराराप्रा को अपना पूंजी आधार बढ़ाने के लिए सरकार से वाषक बजट अथवा बाजार उधार के माध्यम से धनराशि प्राप्त होती है । 

 बोली प्रक्रिया  :

 चयन के लिए सामान्य प्रक्रिया निम्नलिखित दो स्तरीय बोली प्रक्रिया होती है  :-

  • स्तर 1

पूर्व योग्यता - तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञता तथा सदृश परियोजनाओं के संबंध में फर्म के रिकार्ड के आधार पर

  • स्तर 2

पूर्व अर्हता प्राप्त बोलीदाताओं से वाणिज्यिक बोली । स्तर 1 और स्तर 2 के बीच समयान्तर होता है । प्रमुख संविदाकारों/परामर्शदाताओं का ध्यान आकषत करने के लिए भाराराप्रा की निविदाओं का व्यापक प्रचार किया जाता है । निविदा आमंत्रण सूचना वेबसाइट पर दी जाती है और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाती है । 

अंतिम चयन

यदि विश्व बैंक, एडीबी जैसी बहुपक्षीय एजेंसियों द्वारा परियोजना का वित्तपोषण किया जाता है तो वित्त पोषण करने वाले संगठन से बात करके/उसकी सहमति से चयन किया जाता है । अन्य प्रकार की परियोजनाओं के लिए मानक प्रक्रिया के अनुसार चयन किया जाता है । 

 विभिन्न प्रापण प्रक्रियाएँ

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगी बोली  ( आईसीबी )

 यह प्रक्रिया उन मामलों में अपनाई जाती है जिनमें परियोजनाएँ अन्तर्राष्ट्रीय ऋणदाता एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित की जा रही हो तथा जिनके लिए पर्याप्त मात्रा में स्वदेशी परामर्शदाता/ठेकेदार/कंसोटयम उपलब्ध न हों ।

 स्थानीय  ( राष्ट्रीय ) प्रतियोगी बोली  ( एलसीबी/एनसीबी )

  भाराराप्रा द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ  ( आम तौर पर)

 परामर्शी सेवायें

   परामर्शी सेवायें क्या - क्या हैं ?

  • सूचना प्रौद्योगिकी सेवायें

  • व्यवहार्यता अध्ययन और परियोजना तैयार करना

  • निर्माण पर्यवेक्षण

  • राजमार्ग क्षेत्र का अध्ययन

  • अन्य 

 

  परामर्शदाताओं की नियुक्ति अधिकतर निम्नलिखित आधार पर की जाती है :

  • गुणवत्ता और लागत आधारित चयन

  • गुणवत्ता आधारित चयन

  • एकल स्रोत चयन  ( कभी-कभी)

परामर्शी सेवाओं में क्या-क्या शामिल है  ? - तकनीकी प्रस्ताव  ( त.प्र. ) और वित्तीय प्रस्ताव  ( वि.प्र. )

तकनीकी प्रस्ताव

  • पृष्ठभूमि संबंधी सूचना, सदृश निर्माण काय का अनुभव

  • दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली, कार्य योजना

  • मैंनिंग शैडचूल, प्रमुख कामकों का आत्मसंक्षेप

  • विचारार्थ विषय के संबंध में टिप्पणी और सहयोजित व्यवस्था यदि कोई है 

वित्तीय प्रस्ताव

  • एकमुश्त, लागत जमा शुल्क आधार, अपनी ओर से किए गए व्यय, मैन मन्थ दरें

  • यात्रा और परिवहन, कार्यालय परिसर, स्टेशनरी

  • कम्प्यूटर और उपस्कर प्रभार, उपस्करों की आपूत

  • सहायक कर्मचारी 

गुणवत्ता और लागत आधार पर परामर्शदाताओं का चयन

विचारार्थ विषय तैयार करना  ( वि.वि )

  • लघु सूची तैयार करना

    • समूचे पूर्व अर्हता दस्तावेज का खुला विज्ञापन

    • भाराराप्रा के पास मौजूद तथा उधार देने वाली एजेंसियाँ से लम्बी सूची

  • आमंत्रण पत्र, विचारार्थ विषय तथा मसौदा करार जारी करना

  • तकनीकी प्रस्ताव  ( त.प्र. ) और वित्तीय प्रस्ताव  ( वि.प्र. ) प्राप्त करना

  • तकनीकी प्रस्ताव का समिति द्वारा मूल्यांकन

  • तकनीकी प्रस्ताव में अर्हता प्राप्त परामर्शदाताओं के वित्तीय प्रस्ताव खोलना

    • परामर्शदाताओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में

    • वित्तीय प्रस्ताव खोलने से पहले तकनीकी प्रस्ताव में प्राप्त अंक बताए जाते हैं 

  • तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव का संयुक्त मूल्यांकन

  • उच्चतम कोटि प्राप्त परामर्शदाता के साथ तकनीकी मुछों पर बातचीत

  • ठेका देना 

परामर्शदाताओं का गुणवत्ता और एकल स्रोत चयन कैसे और कब

  • गुणवत्ता पर आधारित चयन    :  एडीबी और जेआईबीसी द्वारा अंगीकार

    • तकनीकी प्रस्ताव के मूल्यांकन के पश्चात् उच्चतम कोटि प्राप्त परामर्शदाता के वित्तीय प्रस्ताव पर समिति द्वारा बातचीत की जाती है

    • सफल बातचीत के बाद कार्य का ठेका प्रदान किया जाता है ।

  • एकल स्रोत चयन   :  केवल अत्यावश्यक मामलों में

    • जब कार्य वर्तमान अध्ययन के विस्तार से संबंधित हो तथा उसी फर्म को दिया जाना हो

    • जब त्वरित चयन आवश्यक हो ।

    • जब फर्म क्षेत्र विशेष में उत्कृष्ट अनुभव रखती हो । 

सिविल निर्माण कार्य संविदा प्रापण हेतु प्रक्रिया

  • पूर्व अर्हता हेतु संविदाकारों को आमंत्रित करना

    • संविदाकारों की पूर्व अर्हता

    • पूर्व अर्हता प्राप्त संविदाकारों को निविदा  ( बोली ) दस्तावेज जारी करना

    • निविदा प्राप्त करना और निविदाकारों की उपस्थिति में निविदाएँ खोलना

    • निविदाओं का मूल्यांकन

    • ठेका देना 

सिविल निर्माण कार्य संविदा प्रापण का ब्यौरा 

  • संविदाकारों की पूर्व अर्हता

    • प्रेस अधिसूचना और समूचे पूर्व अर्हता दस्तावेज को     www.nhai.org  पर डालना

    • पूर्व अर्हता आवेदन पत्र जमा करना

    • मूल्यांकन प्राचल

      • वित्तीय 

      • औसत वाषक कारोबार, बोली क्षमता, नगद परिसंपत्तियाँ

    •  तकनीकी

      • कामक संगठन, संयंत्र और उपस्कर

    • सदृश कार्य के अनुभव का रिकार्ड

      • संतोषजनक प में समय से कार्य पूरा करना तथा मुकदमेबाजी

    • निविदाओं का मूल्यांकन

      • बोली प्रतिभूति, पूर्णता और हस्ताक्षर, परिकलन संबंधी अशुद्धयों को ठीक करना

    • तकनीकी प्रतिभूति

      • ठोस बोली

      • ऐसी निविदा जो बिना किसी महत्वपूर्ण अंतर के निविदा दस्तावेजों की सभी शत और विनिदशनों की पुष्टि करती हो  

    • न्यूनतम बोलीदाता को ठेका देने के लिए केवल ठोस निविदाओं की ही तुलना की जाती है । 

 बोली दस्तावेज में सामान्य तौर पर क्या-क्या शामिल होता है ष्

  • खण्ड । 

    • बोलीदाताओं के लिए अनुदेश, संविदा की शत,  विशेष शत 

  • खण्ड - ।।  

    • तकनीकी विनिदशन 

  • खण्ड - ।।।

    • बोली  प्रपत्र, मात्रा पत्र, अनुसूचियाँ, मॉडल प्रपत्र

  • खण्ड  - IV  

    • आरेख 

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगी बोली के अंतर्गत सिविल निर्माण कार्य का ठेका देने हेतु प्रमुख प्राचल

  •  मुद्रा परिवर्तन 

    •  बोली खोले जाने की तारीख को विनिमय दर पर सारी राशि एक मुद्रा में परिवतत की जाती है 

  •  मूल्य प्राथमिकता

    • स्वदेशी बोलीदाताओं के लिए मूल्य प्राथमिकता

 

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